अहंकार, एक सत्यानाशी दुर्गुण

अहंकार का नाश करने  के लिए परमात्मा सदा प्रयत्न करते रहते हैं, क्योंकि यही दुर्गुण भव-बंधनों में जीव को बाँधे रहने में सबसे कड़ी लौह शृंखला का काम करता है। अहंकार को ही असुरता का प्रतीक माना गया है। अहंकारी की महत्त्वाकांक्षाएँ संसार के लिए एक विपत्ति ही सिद्ध होती हैं। सिकंदर, तैमूरलंग, नादिरशाह, औरंगजेब, […]

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Mahatma Anandswami And The Rich Man

Once, a wealthy man came to Mahatma Anandswami. He was the owner of several factories. All his sons were pursuing the business well. His wife had passed away previously. In spite of prosperity all around, his heart was not at peace. His hunger and sleep had gone. He humbly intimated his distress and ailment to […]

जीवन का सच्चा सहचर-ईश्वर

ऐसा सबसे उपयुक्त साथी जो निरंतर मित्र, सखा, सेवक, गुरु, सहायक की तरह हर घड़ी प्रस्तुत रहे और बदले में कुछ भी प्रत्युपकार न माँगे, केवल एक ईश्वर ही हो सकता है। ईश्वर को जीवन का सहचर बना लेने से मंजिल इतनी मंगलमय हो जाती है कि यह धरती ही ईश्वर के लोक, स्वर्ग जैसी […]

श्रेय और प्रेय दोनों मार्ग खुले हैं

यहाँ हर श्रेष्ठ व्यक्ति को कठिनाइयों की, असुविधाओं की अग्रिपरीक्षाओं में होकर गुजरना पड़ा है। जो विवेक को अपनाए रहता है, प्रलोभनों में स्खलित नहीं होता और सन्मार्ग से किसी भी कारण कदम पीछे नहीं हटाता, वस्तुत: वही इस भवसागर को पार करता है, वही माया के जादू से अछूता बचा रहता है और उसी का […]

तुम बीच में खड़े हो

तुम परमात्मा की आधी शक्ति के मध्य में खड़े हुए हो, तुमसे ऊँचे देव, सिद्ध और अवतार हैं तथा नीचे पशु-पक्षी, कीट-पतंग आदि हैं। ऊपर वाले केवल मात्र सुख ही भोग रहे हैं और नीचे वाले दु:ख ही भोग रहे हैं। तुम मनुष्य ही ऐसे हो, जो सुख और दु:ख दोनों एक साथ भोगते हो। […]

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Yog in Daily life

One should not do anything with a mind that is demotivated and disengaged. With that mindset, one can never progress. Yog or communion with divinity arises when the heart, the brain and the mind work in unison. Some people are physically present at one place but their mind is somewhere else. For example, our brain […]

जोश के साथ होश

इंद्रियों के दास होकर नहीं, स्वामी होकर रहना चाहिए। संयम के बिना सुख एवं प्रसन्नता प्राप्त नहीं हो सकती। नित्य नए-नए भोगों के पीछे दौडऩे का परिणाम दु:ख और अशान्ति है। श्रीमद्भगवद् गीता पढऩे, सुनने या समझने की सार्थकता इसी में है कि इंद्रियों के वेग तथा प्रवाह में बह जाना, मानव-धर्म नहीं है। किसी […]

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The Easiest Yoga for MIND Control

This is an excellent yogic exercise for controlling the mind and recalling the memory. Go in a crowded gathering or some noisy place where a variety of sounds can be heard. From these sounds, close your eyes and hone in, on any one sound and concentrate on it. Examples are the tick-tick sound of a […]

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हम महानता की ओर क्यों न चलें?

लोग बुराई और भलाई के बारे में अपने अलग-अलग दृष्टिïकोण बनाते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग उस ढंग पर चलें। एक दूसरे में दोष देखने का यही कारण है। दूसरों के सबंध में बुरा कहने वाला मैं कौन हूँ? दूसरों पर बुरा होने का दोष मैं कैसे मढ़ सकता हूँ, जब मैं स्वयं […]

आंतरिक दुर्बलताओं से लड़े

अज्ञान ही सबसे बड़ा बंधन है, इसी के पाश में जीव बँधा हुआ है। माया और अविद्या एक ही वस्तु के दो नाम हैं। जिस माया के वशीभूत होकर प्राणी कुकर्म करता और निविड़ बंधनों में जकड़ा हुआ भवसागर में डूबता-उतराता रहता है, वह और कुछ नहीं अज्ञान एवं भ्रम मात्र ही है। अपने स्वरूप […]